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जीवन का रहस्य

4 वर्ष की उम्र में सफलता यह है , कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते ,8  वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने घर वापिस आने का रास्ता जानते है ,12  वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने अच्छे मित्र बना सकते है ,18  वर्ष की उम्र में मदिरा और सिगरेट से दूर रह पाना सफलता है ,25  वर्षकी उम्र तक नौकरी पाना सफलता है ,30  वर्षकी उम्र में एक पारिवारिक व्यक्ति बन जाना सफलता है ,35  वर्ष की उम्र में आपने कुछ जमापूंजी बनाना सीख लिया ये सफलता है ,45  वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपना युवापन बरकरार रख पाते हैं ,55  वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करने में सक्षम हैं ,65  वर्ष  की आयु में सफलता है निरोगी रहना ,70  वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप आत्मनिर्भर हैं किसी पर बोझ नहीं ,75  वर्ष nकी उम्र में सफलता यह है कि आप अपने पुराने मित्रों से रिश्ता कायम रखे हैं ,80  वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आपको अपने घर वापिस आने का रास्ता पता है ,और 85  वर्ष की उम्र में फिर सफलता ये है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते ,अंततः यही तो जीवन चक्र है . . जो घूम फिर कर वापस व…
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बीवी की अनोखी दास्ताँ

दोस्तों आज हम एक अजीब प्राणी के बारे में पढेंगे
इस जीव का नाम है। "बीवी" यह अक्सर रसोई और टीवी के सामने पाई जाती है
इनका पौष्टिक आहार है पति का भेजा ये पानी कम खून ज्यादा पीती है। इन्हें अक्सर नाराज़ होने का नाटक करते हुए देखा जाता है और पाया जाता है। इस प्राणी का सबसे खतरनाक हथियार है रोना और इमोशनली ब्लैकमेल करना इनको बस यही आता है। उसके संपर्क में रहने से टेंशन नाम की बीमारी हो सकती है।
जिसका कोई इलाज़ नहीं है बस इनसे सावधान रहना चाहिये "भारत सरकार द्वारा जनहित में जारी" है
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पूरी रामायण बीवियों की कहानी हैं 
लक्ष्मन अपनी बीवी को घर पे छोड़कर चले गये रावण दुसरे की बीबी उठा के फँस गया सुग्रीव ने श्रीराम का साथ इस लिए दिया क्योंकि ‌
सुग्रीव को उसकी बीबी वापस चाहिए थीं जो बाली के पास थी हनुमान जी की अपनी बीबी थी ही नही मगर दुसरे के लिए लंका जला ड़ाली श्रीराम को अपनी वापिस चाहिए थी तो उनको 10 दिनों तक युद्ध करना पड़ा और अंत में क्या हुआ जिस बीवी के कारण इतनी रामायण हुई ओ जमीन के नीचे चली गयी अभी सोचो इतना …

हमारे अली साहब क्या बोलेते है

हमारे देवरिया जिले के एक भाई है जिनका नाम है साकिब अली वाह क्या बात करते है जब देखो तब बस ज्ञान की बाते करते।
जो ध्यान से सुनेगा ओ लायक वार्ना नालायक़ देखिये एक दिन बातो बातो में क्या ज्ञान दिए हमे ऐसे ही एक दिन मैंने कह दिया कि आप अपने आप को समझते क्या है फिर क्या आप सोच लो मेरी तो वॉट लगा दी उन्होंने।
फिर कुछ सीख दिए मुझे "कोशिश आखरी सास तक करनी चाहिए, फिर मैंने पूछा क्यू तो अली साहब ने बहुत ही मधुर स्वर में बोला की "मंजिल" मिले या "तजुर्बा" चीजे दोनों ही नायाब है,,,,,,,,,
कोसिस करते रहिए उसका परिणाम कुछ न कुछ जरूर मिलेगा।

चुटकुला

देवरिया जिले के एक लड़के ने अपनी गर्लफ्रेंड को फोन किया तो उसके पापा ने उठा लिया, लड़का मन मे बोला हे भगवान ये कहॉ से आ गया, पिता : हैलो, कौन बोल रहा है? लड़का : मैं अमिताभ बच्चन बोल रहा हूँ, कौन बनेगा करोड़पति" से और आपकी बेटी की फ्रेंड हॉट सीट पर बेठी है और आपकी बेटी की मदद चाहती है, उसको फोन दीजिये श्री मानपिता : ओह, रोमांचित हो कर बेटी को फोन दे दिया,लड़का : सवाल यह "आप हमें कौन से चौराहे मे मिलोगी?"(Option A) : हनुमान मंदिर(Option B) : स्टेशन पर(Option C): भीखमपुर मोड़(Option D);न्यू कालोनी पार्क लडकी : "Option : Aलड़का : धन्यवाद, और अब आप का समय समाप्त होता है.पिता अभी तक खुशी के मारे फुले नहीं समा रहे थे, ,,,,,,,,,,,,ये है देवरिया के छोरे ये कुछ भी कर सकते है
                क्यों कि ये सब के बाप है

गुजरा हुआ कल

जिन्दगी का एक ओर वर्ष कम हो चला,
कुछ पुरानी यादें पीछे छोड़ चला..कुछ ख्वाईशैं दिल मे रह जाती हैं..
कुछ बिन मांगे मिल जाती हैं ..कुछ छोड़ कर चले गये..
कुछ नये जुड़ेंगे इस सफर मे ..कुछ मुझसे बहुत खफा हैं..
कुछ मुझसे बहुत खुश हैं..कुछ मुझे मिल के भूल गये..
कुछ मुझे आज भी याद करते हैं..कुछ शायद अनजान हैं..
कुछ बहुत परेशान हैं..कुछ को मेरा इंतजार हैं ..
कुछ का मुझे इंतजार है..कुछ सही है
कुछ गलत भी है.कोई गलती तो माफ कीजिये और
कुछ अच्छा लगे तो याद कीजिये।

समय का खेल

एक सेठ जी थे
जिनके पास काफी दौलत थी.
सेठ जी ने अपनी बेटी की शादी एक बड़े घर में की थी.
परन्तु बेटी के भाग्य में सुख न होने के कारण उसका पति जुआरी, शराबी निकल गया.
जिससे सब धन समाप्त हो गया. बेटी की यह हालत देखकर सेठानी जी रोज सेठ जी से कहती कि आप दुनिया की मदद करते हो,
मगर अपनी बेटी परेशानी में होते हुए उसकी मदद क्यों नहीं करते हो? सेठ जी कहते कि
"जब उनका भाग्य उदय होगा तो अपने आप सब मदद करने को तैयार हो जायेंगे..." एक दिन सेठ जी घर से बाहर गये थे कि, तभी उनका दामाद घर आ गया.
सास ने दामाद का आदर-सत्कार किया और बेटी की मदद करने का विचार उसके मन में आया कि क्यों न मोतीचूर के लड्डूओं में अर्शफिया रख दी जाये...
यह सोचकर सास ने लड्डूओ के बीच में अर्शफिया दबा कर रख दी और दामाद को टीका लगा कर विदा करते समय पांच किलों शुद्ध देशी घी के लड्डू, जिनमे अर्शफिया थी, दिये... दामाद लड्डू लेकर घर से चला,
दामाद ने सोचा कि इतना वजन कौन लेकर जाये क्यों न यहीं मिठाई की दुकान पर बेच दिये जायें और दामाद ने वह लड्डुयों का पैकेट मिठाई वाले को बेच दिया और पैसे जेब में डालकर चला गया. उधर सेठ जी…